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भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले कारकों के बारे में तो हम सब बात करेंगे ही इस लेख में, लेकिन आइये भारत का थोड़ा सा इतिहास जानने की कोशिश करते हैं। किस तरीके से हमारा देश बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करते हुए धीरे-धीरे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता गया जैसा कि आप सब ने एक शब्द जरूर सुना होगा कि भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था सोने की चिड़िया कहने के पीछे बहुत बड़ा राज है, तो आइये हम विस्तार से जानते हैं हमारा भारत देश जो कि एक कृषि प्रधान देश है इसके साथ साथ बहुत सारी संस्कृतियों से मिलकर बना है जहां पर आये दिन बहुत सारी परेशानियों का सामना करते हुए यह उभरा है भारत पर बहुत सारे शासकों ने राज किया कुछ तो बात हुई रही होगी हमारे देश में वरना हर कोई इसके ऊपर राज करना क्यों चाह रहा था ? भारत पर राज करने की सबसे बड़ी वजह भारत की अर्थव्यवस्था थी भारत 1 सदी से लेकर 10 वीं सदी तक विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश था। धीरे धीरे बहुत सारे शासकों का भारत पर राज करना और अर्थव्यवस्था का धीरे धीरे कमज़ोर होना चिंता का विषय है।  गूगल विकीपीडिया के अनुसार –
भारतहरयंक वंश (544 ईसा पूर्व – 413 ईसा पूर्व)
मौर्य वंश (321 ईसा पूर्व –184 ईसा पूर्व)
दिल्ली सल्तनत (1206 ईस्वी –1526 ईस्वी)
खिलजी वंश (1290 ईस्वी –1320 ईस्वी)
तुगलक वंश (1320 ईस्वी- 1414 ईस्वी)
सय्यद वंश (1414 ईस्वी –1451 ईस्वी)
लोदी वंश (1451 ईस्वी- 1526 ईस्वी)
मुगल साम्राज्य (1526 ईस्वी- 1858 ईस्वी)
ब्रिटिश शासन (1858 ईस्वी –1947 ईस्वी)
जैसे तमाम लोगों ने भारत पर राज किया हर शासक का एक सपना था कि भारत जैसे सोने की चिड़िया वाले देश पर राज किया जाये गूगल विकीपीडिया के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और क्षेत्रफल के दर से विश्व में सातवें स्थान पर भारत है जनसंख्या में चीन के बाद भारत दूसरा सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश है और जितनी बड़ी जनसंख्या उतना ज्यादा भारत की अर्थव्यवस्था पर खतरा।
आर्थिक इतिहासकार एंगस मैडिसन के अनुसार पहली सदी से लेकर दसवीं सदी तक भारत की अर्थव्यवस्था विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी। पहली सदी में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) विश्व के कुल जीडीपी का 32.9% था वही  सन् 1000 में यह 28.9% था ,और सन् 1700 में 24.4% था। भारत की अर्थव्यवस्था पर अंग्रेजों द्वारा जमकर शोषण किया गया और 1947 की आजादी के बाद भारत की आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब थी। भारत का जितना सोना चांदी था अंग्रेजों ने सारी चिज़ो को लूट लिया जिसके कारण भारत की स्थिति भयानक नजर आने लगी फिर उसके बाद सन् 1991 में भारत के पास जो कुछ भी खजाना बचा हुआ था उसको भी गिरवी रखना पड़ा उसके बाद धीरे-धीरे भारत को विदेशी पूंजी निवेशकओं से मदद मिली और अमेरिका भारत का सबसे बड़ा सहयोगी बना उसके बाद भारत 2003 में 7.4 प्रतिशत विकास दर से आगे बढ़ने लगा और यह आंकड़ा यहीं नहीं रुका 2005 से लेकर 2008 तक लगातार तीन साल भारत की विकास दर 9% तक बढ़ गयी ।

तो यह था भारत की अर्थव्यवस्था का इतिहास भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले कारकों की सूची बहुत ही लंबी है लेकिन आइये कुछ महत्वपूर्ण बिंदु पर विस्तार से चर्चा करते हैं

1. डॉलर की मजबूती और रुपए की गिरावट:
आये दिन भारत की मुद्रा डॉलर के मुताबिक गिरती चली आ रही है साल 2022 कहीं ना कहीं भारतीय मुद्रा के लिए सही नहीं रहा क्योंकि साल की शुरुआत होते ही जनवरी के महीने में डॉलर के मुताबिक भारतीय मुद्रा इस साल जनवरी से लेकर अब तक भारतीय मुद्रा करीब 6 % की दर से गिर चुका है जिसके दो मुख्य कारण हैं पहला कारण यूक्रेन युद्ध और दूसरा सबसे बड़ा कारण विदेशी निवेशकों का भारत से अपने निवेश को निकाल लेने की सबसे बड़ी वजह बताई जा रही सरकारी आकड़ो के मुताबिक पिछले 6 महीनों मे विदेशी निवेशकों ने  भारत से करीब 2320 अरब रुपए निकाल लिए है, जो की बहुत बड़ा चिंता का विषय हैं युद्ध की वजह से तेल, गेहूं, खाद जैसे उत्पादों, जिनके रूस और यूक्रेन बड़े निर्यातक हैं, उनकी आपूर्ति कम हो गई है और दाम बढ़ गए हैं चूंकि भारत विशेष रूप से कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, देश का आयात पर खर्च बहुत बढ़ गया है आयात के लिए भुगतान डॉलर में होता है जिससे देश के अंदर डॉलरों की कमी पड़ जाती है और डॉलर की कीमत बढ़ जाती हैं
ये नीचे कुछ आंकड़े है जो 1947 यानी आज़ादी के बाद से लेकर 2021 तक के हैं किस प्रकार भारतीय मुद्रा डॉलर के सामने चित नज़र आरहा है

अगर डॉलर के आंकड़े ऐसे ही बढ़ते रहे तो आने वाले 10 सालों मे भारत की गरीबी चरम पर हो जायेगी जो भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले बहुत बड़े कारक हैं।

2. गरीबी : भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने के कारकों में से सबसे बड़ा कारक गरीबी भी है जो भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रतिदिन चैलेंज देता रहता है ग्रामीण विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार देश की 22% आबादी आज भी गरीबी रेखा के नीचे जा रही है जबकि भारत की आजादी के समय गरीबी 80 प्रतिशत पर थी अगर हम सीधे तौर पर बात करें तो आजादी के वक्त देश में 25 करोड़ लोग गरीब थे और आज यह आंकड़ा 26.9 करोड़ पर है जब भारत आजाद हुआ था तब भारत की कुल आबादी लगभग 34 करोड़ के आसपास थी जिसमें से 25 करोड़ लोग गरीब थे आखरी बार 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में कुल 121 करोड़ की आबादी हो चुकी है और गरीबों की संख्या 26.9 करोड़ है इससे यह पता चलता है कि भारत की गरीबी कहीं ना कहीं वहीं पर टिकी हुई है इजाफा सिर्फ भारत की आबादी में हुआ है 2017 में नेशनल हेल्थ केयर सर्वे के अनुसार आज भी भारत मे करीब 19 करोड़ लोग खाली पेट सो जाते हैं और इसके साथ साथ भूख और कुपोषण के शिकार की वजह से भारत में 1 दिन में करीब 45 सौ बच्चे रोज मर जाते हैं यह आंकड़े खुद से बनाए हुए आकड़े नहीं है बल्कि सरकारी नेशनल हेल्थ सर्वे के बनाए हुए आंकड़े हैं जिनको देखकर हम सबकी आंखें नम हो जाती है। प्राइवेट जेट, बड़ी-बड़ी सरकारी गाड़ियां, सरकारी आवास में रहने वाले बड़े-बड़े नेताओं के कानों में जूं तक नहीं रेंगती भुखमरी के आंकड़े बताते हैं कि भारत में हर साल 3 लाख लोगों की मौत होती है जिसकी महत्वपूर्ण वजह भूखमरी होती है अगर हम हंगर इंडेक्स पर नजर डालें तो यह आंकड़े प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे हैं कम होने का नाम नहीं ले रहा है। 2021 के ग्लोबल हंगर इंडेक्स पर एक नजर डालें तो भारत 116 देशों में से फिसलकर 101वें स्थान पर आ पहुंचा है 2020 में भारत जहां 107 देशों में 94वें स्थान पर था, वहीं 2021 में 116 देशों में यह 101वें स्थान पर आ गया है!

भारत का जीएचआई स्कोर भी नीचे चला गया है यह साल 2000 में 38.8 था और 2012 से 2021 के बीच यह 28.8- 27.5 के बीच रहा है सारे आंकड़े बताते हैं कि भारत अपने पड़ोसी मुल्कों से भी बहुत ही पीछे है टीवी डिबेट में बैठकर पाकिस्तान हिंदुस्तान हिंदू मुसलमान करने वाले लोगों ने अपने देश की स्थिति के बारे में सोचना ही बंद कर दिया है भारत के कई राज्यों के कई गांव इतने पिछड़े हैं कि जहां पर सरकारी सर्वे करने वाले कर्मचारी भी नहीं पहुंच पाते अगर भारत की यही स्थिति रही तो आने वाले 10 साल में गरीबी दर कम नहीं हुई तो भारत की अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो सकती है सरकार को चाहिए कि अमीरों पूंजीपतियों का ख्याल रखने की बजाए देश के गरीबों का ख्याल रखें उनकी जरूरतों को समझें उनके लिए अहम मुद्दे को लेकर आए।

भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले कारकों की सूची बहुत ही लंबी है लेकिन मैंने दो महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की है वरना ऐसे कई सारे महत्वपूर्ण कारक हैं जो दिन प्रतिदिन भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं भारत की ऐसी स्थिति को बचाने के लिए हम सब भारत वासियों को मिलकर कार्य करना होगा और जल्द से जल्द इन कारकों के निवारण को भी ढूंढना होगा!   धन्यवाद

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